” हजरत मुहम्मद ” (1) क्रूरता, नृशंसता के स्वेच्छाचार में सराबोर अरब के अज्ञानकाल में विक्रमीय संवत् 617 अर्थात् 560 ईस्वी (हर्षवर्धन काल) में मक्का के प्रसिद्ध “क़ुरैश वंश” के हासिम परिवार में “मुहम्मद” का जन्म हुआ था। (2) इनकी माताजी का नाम “आम्ना” और पिताजी का नाम “अब्दुल्ला” था। जब ये दो वर्ष के थे, तभी पिताजी का देहान्त हो गया था। जब ये 5 वर्ष के हुये तो माताजी का स्वर्गवास हो गया और फिर 8 वर्ष की उम्र में पहुँचते समय इनके बाबा भी दुनिया छोड़कर चल बसे। (3) अब इनके देखभाल की ज़िम्मेवारी इनके चचा “अबू तालिब” पर आ पड़ी। इस तरह अबू तालिब के स्नेहमय संरक्षण में पशुओं को चराते, खेलते - कूदते उनका स्वच्छन्द बाल्यकाल बीता। (4) युवावस्था में ही उनको अनेक ईसाई संतों का समागम प्राप्त हुआ, जिसके फलस्वरूप काबा में स्थित मूर्तिपूजा के विकृत स्वरूप ने उनके मन को अधिक विद्रोही होने की प्रेरणा दी। (5) सदाचारी मुहम्मद धर्म और नीति दोनों में कुशल थे। उन्होंने उस समय मक्का में प्रचलित रूढ़ि और पाखन्डवाद के विरूद्ध आवाज़ उठाई। तत्कालीन पाखन्डवाद और अनाचार में ग्रस्त कुरैश-वंश, युवा मुहम्मद क...
Missing number in a wheel § Q. What is missing number in following wheel as described below ? Pic 1 ➤ Soln-1: The most talked solution to this problem is given by the following observation: The solution is 26. This is a well established solution of this problem. A YouTube reference is also available for this problem. One can check it at: https://youtu.be/vtFEiQM-G5I?si=VZxnBFaPYNmbIz9E ➤ Soln-2: Second solution stems from following fact: In the Pic 1, see the first quadrant and third quadrant in their outer circle opposite shells, we have 8+6 =14 and 4+10 = 14. Both are having constant values 14. In the corresponding inner circle 20+14 = 34 in the 3rd quadrant. In the analogy, if we examine second and fourth quadrant with values in their outer circle opposite shells, we have 7+4=5+6= 11. Therefore assuming 4th quadrant would be greater than the second quadrant ...
दीपावली में तीनों युगों का समावेश ! अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही? दूसरा यह कि दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है, विष्णु भगवान की क्यों नहीं? इन प्रश्नों का उत्तर अधिकांशतः बच्चों को नहीं मिल पाता और जो मिलता है उससे बच्चे संतुष्ट नहीं हो पाते।आप अपने बच्चों को इन प्रश्नों के सही उत्तर बतायें। दीपावली का उत्सव दो युग, सतयुग और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है। सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी इसलिए लक्ष्मीजी का पूजन होता है। भगवान राम भी त्रेता युग में इसी दिन अयोध्या लौटे थे तो अयोध्या वासियों ने घर घर दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था इसलिए इसका नाम दीपावली है।अत: इस पर्व के दो नाम है लक्ष्मी पूजन जो सतयुग से जुड़ा है दूजा दीपावली जो त्रेता युग प्रभु राम और दीपों से जुड़ा है। लक्ष्मी गणेश का आपस में क्या रिश्ता है और दीवाली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है? ...